The Strength Legends: दारा सिंह

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स्वर्गीय दारा सिंह हमारे देश के एक भूले बिसरे कुश्ती “Legends” में से एक हैं। ज्यादातर लोग उन्हें रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ में निभायी गयी  ‘हनुमान’ की भूमिका के लिए जानते हैं। 40 के दशक की शुरुआत से लेकर 80 के दशक तक जो उपलब्धियां उन्होंने  कुश्ती के क्षेत्र में हासिल की वो ज्यादातर लोगों की यादों से धुंधली हो चुकी हैं। अब, जबकि ‘दंगल’ और ‘सुल्तान’ जैसी फिल्मों के आने के बाद लोगों का कुश्ती के प्रति उत्साह फिर से जगा है, तो ये सही समय है की हम कुश्ती के पूर्व ‘World Champion’ की उपलब्धियों को याद करके उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करें।

कुश्ती का पूर्व-नायक

दारा सिंह ने पारंपरिक ‘अखाड़ा’ पहलवान के रूप में कुश्ती की शुरुआत की थी, और उन्हें ‘देसी’ शैली में ही प्रशिक्षण प्राप्त था। उन्होंने कभी ओलिंपिक-शैली की कुश्ती में प्रतिस्पर्धा नहीं की, बल्कि, वह ब्रिटिश प्रोफेशनल रेसलिंग (BPW) नामक कुश्ती परंपरा के चैंपियन थे।

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दारा किंगकॉन्ग को एक Mounted पंच जड़ते हुए

कुश्ती की ये शैली World Wrestling Entertainment (WWE) जैसी ही थी परन्तु बिना ओछापन और कम हिंसा के।  6’2″ कद-काठी और 130 Kg वज़न वाले पहलवान दारा सिंह BPW के लिए ‘John Cena’  और ‘The Rock’ का संमिश्रण थे। उनका शरीर-सौष्ठव और व्यक्तित्व बेमिसाल थे। भारतीयों के लिए वह अत्याचारी और अनाधिकारी औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारतीय पराक्रम का प्रतिनिधित्व करते थे। 201 Kg वज़नी दुर्जेय ऑस्ट्रेलियाई पहलवान किंगकॉन्ग के खिलाफ दारा के कुश्ती मुक़ाबले के दौरान दर्शकों की भावोत्तेजना देखने लायक थी। जब उन्होंने विशालकाय किंगकॉन्ग को सर से ऊपर उठाकर रिंग के बाहर फेंक दिया तो सारा स्टेडियम लोगों के चीत्कार और हर्षोन्माद से गूँज उठा था। सन 1950 और 60 के दौरान उनके प्रशंसकों की संख्या इतनी अधिक थी कि भारत में उनका नाम ही कुश्ती का पर्याय बन गया था।

विश्वव्यापी प्रसिद्धि और मान्यता

सिंह ने कई एशियाई देशों का दौरा किया। सिंगापुर में उन्हें ‘मलेशिया का चैंपियन’ शीर्षक से सम्मानित किया गया था। वह 26 वर्ष की आयु में ही राष्ट्रीय चैंपियन बन गए, और अपने कुश्ती कौशल के बल पर उन्होंने पूरे देश में सम्मान हासिल किया। 1959 में वे पिछले चैम्पियनों नामतः किंग कांग, जॉर्ज गॉर्डिन्को और जॉन डिसिल्वा को हराकर कॉमनवेल्थ चैंपियन बन गए। उनके करियर का शीर्ष बिंदु 1968 में आया, जब उन्होंने मल्टी-टाइम चैंपियन दिग्गज विजेता ‘लू थीस’ को हराया और “विश्व चैंपियन” बन गए। वे अपने कुश्ती कैरियर में कभी भी कोई मैच नहीं हारे।

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दारा सिंह अपनी ट्राफियां प्रदर्शित करते हुए

1996 में दारा सिंह का नाम प्रतिष्ठित रेस्लिंग ऑब्जर्वर न्यूज़लैटर हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया। उन्हें ‘रुस्तम ऐ हिंद’ और ‘रुस्तम ऐ पंजाब’ सहित कई खिताब और पुरस्कारों से भी नवाज़ा जा चुका है। उन्होंने 1983 में दिल्ली में आयोजित एक कुश्ती प्रतियोगिता के पश्चात् कुश्ती से अपनी रिटायरमेंट की घोषणा की। तत्कालीन राष्ट्रपति ग्यानी जैल सिंह और राजीव गांधी जैसे मुख्य अतिथियों ने उपस्थित रह कर इस कुश्ती के सितारे को अलविदा दी थी। वह पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्हें राज्यसभा में नामांकित किया गया, और 2003 से 2009 तक उन्होंने एक सक्रिय सदस्य के रूप में कार्य किया।

प्रशिक्षण

दारा “पहलवानी” या भारतीय शैली की कुश्ती जोकि परंपरागत रूप मिटटी पर लड़ी जाती है, में निपुण थे। कुश्ती की यह विशेष शैली मुगल काल के दौरान प्राचीन ‘मल्ल-युद्ध’ कला और फारसी कला ‘वर्जेश-ए-बस्तिनी’ के संयोजन से विकसित की गई थी। बाबर – पहला मुगल सम्राट, जो खुद एक अच्छा पहलवान था, को पहलवानी के विकास और प्रचार का श्रेय दिया जाता है। ‘पहलवानी’ और ‘कुश्ती’ शब्द क्रमशः ‘पहलावानी’ और ‘कोशती’ फारसी शब्दों से निकले हैं। इस खेल के खिलाडियों को पहलवान के रूप में जाना जाता है, जबकि शिक्षकों को उस्ताद कहा जाता है।

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दारा सिंह ने पहली बार कुश्ती का स्वाद अपने बचपन चखा और वह हमेशा के लिए इसके कायल हो गए। वह एक सामान्य वर्ग के घर-परिवार से सम्बंधित थे लेकिन परिवार का समर्थन उन्हें प्राप्त था। उन्होंने बिना किसी आधुनिक व्यायामशाला और Mat ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं के, हमेशा पारम्परिक पहलवानी शैली में ही कुश्ती की प्रशिक्षा प्राप्त की। दारा की ट्रेनिंग में हर रोज़ दिन में दो बार कसरत-अभ्यास करना शामिल था, जिसमें एक सत्र Technique के लिए समर्पित था, और दूसरा सामान्य शक्ति और कंडीशनिंग (S & C) के लिए। प्रतिदिन 1200 दंड (Hindu Push-Ups), और 1200 बैठकों (Squats) का अभ्यास एक सामान्य बात थी। हर कसरत-अभ्यास की अवधि 3 से 4 घंटे के बीच होती थी। प्रत्येक सप्ताह एक दिन पूरी तरह से आराम करने के लिए निर्धारित किया जाता था।

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पहलवान दंड और बैठक लगाते हुए

आहार

दारा सिंह Off-Season के दौरान अपने दैनिक दिनचर्या और आहार का विवरण देते हुए अपनी आत्मकथा में एक मजेदार घटना (6) का उल्लेख करते हैं, जब एक कुश्ती प्रबंधक उन्हें और उनके साथी पहलवानों को फिल्म देखने का न्योता देता है। दारा सिंह अपने ट्रेनिंग कार्यक्रम को बहुत गंभीरता से लेते थे और इसमें उन्हें किसी भी प्रकार की खलल गवारा नहीं थी, सो उन्होंने नीचे बताये गए अपने सुपर व्यस्त दिनचर्या और कार्यक्रम की वजह से आउटिंग के लिए समय निकालने में असमर्थता व्यक्त करते हैं:

प्रातः 4 से 8सुबह का व्यायाम
9 बजेPost Workout Tonic: ठंडाई
12 बजेदोपहर का भोजन
दोपहर 1 से 3विश्राम
शाम 4 से 8शाम का व्यायाम
9 बजेरात का भोजन

DaraSingh muscularityदारा सिंह का दैनिक आहार बहुत सरल और सीमित विविधता वाला था, और जब हम दूसरे बड़े नामचीन पहलवानों के साथ इसकी तुलना करते हैं तो मात्रा में भी अपेक्षाकृत अल्प लगता है। दारा सिंह की खुराक में प्रति दिन 100 ग्राम बादाम, 100 ग्राम मुरब्बा या मौसमी फल और 100 ग्राम देसी घी, 2 लीटर दूध, आधा किलो मांस या 2 मुर्गियां, 10 चांदी के वर्क और 6-8 रोटी हर दिन शामिल होता था। प्रत्येक दिन केवल दो बार ही भोजन किया जाता था, दोपहर में और रात में। कसरत के बाद के भोजन में ‘ठंडाई’ (बादाम, घी, चीनी और दूध से बना एक पारंपरिक टॉनिक) और बाद में चिकन / Lamb सूप शामिल होता था।

दारा सिंह शरीर के Metabolism के आधार पर व्यक्तिगत आहार लेने में दृढ़ विश्वास रखते थे, और उन्हें शरीर की शीत / गर्म / तटस्थ प्रकृति (चीनी चिकित्सा की अवधारणा) अनुसार खुराक लेने में यकीन था। इसके अलावा वह सप्ताह में एक दिन पूर्ण या आंशिक उपवास शरीर की detoxification और Metabolism को दुरुस्त रखने के लिए किया करते थे। एक बार तो उन्होंने एक बड़े ब्रांड के वनस्पति तेल के एक आकर्षक विज्ञापन की पेशकश को भी ठुकरा दिया, क्योंकि उनका मानना था कि देसी घी परिष्कृत तेलों की तुलना में शरीर के लिए बहुत बेहतर है।

दारा सिंह – एक अच्छे इंसान

एक बढ़िया एथलीट होने के अलावा, दारा सिंह अत्यंत धैर्यवान और दृढ़ इच्छा-शक्ति के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में महान सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की। दारा सिंह साहस, दृढ़ संकल्प, और अच्छे चरित्र जैसे दिव्य गुणों के स्वामी भी थे। उन्होंने हमेशा धर्म और सर्वशक्तिमान पर विश्वास किया लेकिन उन्होंने कभी भी अपना जीवन देवताओं की दया-दृष्टि के सहारे नहीं छोड़ा और हमेशा कर्मठ बने रहे।

सिंह अपनी शक्तिओं के साथ ही अपनी कमियों से भी भली प्रकार अवगत थे और स्वयं के साथ पूर्ण निष्पक्षता से ईमानदार थे। उन्होंने खुद को बेहतर बनाने के लिए अपने पूरे जीवन में बहुत मेहनत की। अपने जीवन के शुरुआती दौर में उन्हें इस बात का दुःख था कि वह गुरुमुखी लिपि (पंजाबी) के अलावा और कुछ भी नहीं पढ़ सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने आप से अंग्रेजी सीखने का अभ्यास किया, भले ही इस बात के लिए उनके उस्ताद और साथी पहलवानों ने उनकी खिल्ली उड़ाई। राज्य सभा में संसद के एक सदस्य के रूप में उन्होंने एक बार प्रश्न किया, “कम पढ़ा लिखा होने के कारण मैं शिक्षा का सही मूल्य जानता हूं। क्या यह शर्म की बात नहीं है कि 61 साल की आजादी के बाद भी हमारे पास 100% साक्षरता नहीं है?” आज तक उनके इस प्रश्न का सही उत्तर किसी राजनेता ने नहीं दिया।Dara Singh as MP

हम लोग जो स्वयं के उदारवादी या प्रगतिशील होने पर गर्व करते हैं, कभी-कभी खुद की पीठ थप-थपाने में बहुत जल्दबाज़ी करते हैं: हम स्वयं को प्राप्त सुविधाओं और परिस्थितियों को नजरअंदाज कर जाते हैं जो हमारे गुणों को विकसित करने के अनुकूल थी; और हम उन लोगों को कमतर करके जानते हैं जो कि एक प्रतिबंधात्मक और रूढ़िवादी माहौल में पैदा हुए, और जिन्होंने अपनी गलतियों से सीख कर जीवन के सही मूल्यों और, ‘समानता’ और ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ जैसी अवधारणाओं के वास्तविक अर्थ को समझा। दारा सिंह की कहानी एक ऐसे बहु-आयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के बारे में है जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाले एक बलवान पहलवान की कथा से भी ज्यादा प्रेरणादायक है (3)।

Autobiography of Dara Singh

दारा सिंह की आत्मकथा हिंदी में यहाँ मुफ्त उपलब्ध है। यदि आप इसे पढ़ेंगे और उनके जीवन के अनुभवों को उनके ही शब्दों में जान पाएंगे तो यह एक विशाल व्यक्तित्व वाले प्रतापी व्यक्ति को एक महान श्रद्धांजलि होगी।

संदर्भ:

  1. Story of Dara Singh-the original king of the dangal. Vir Sanghvi, Hindustan Times.
  2. The Original ‘Mard’. Avijit Ghosh, The Times Of India.
  3. Dara Singh-The Champion of the World. Above The Line, Jai Arjun Singh.
  4. Remembering Dara Singh. India Today.
  5. Deedara aka Dara Singh. Seema Sonik Alimchand, Westland Books.
  6. Meri Aatamkatha by Dara Singh.
  7. dara-singh.com. The official website of Dara Singh.

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