बेंच प्रेस कैसे बढ़ाएं

Franco Columbu Bench Presses Heavy

बेंच प्रेस दुनिया भर के सभी Lifters का पसंदीदा अभ्यास है, और हर कोई जानना चाहता है कि कैसे अपनी बेंच प्रेस को बढ़ाएं।

पूरे विश्व में जिम जाने वाले लोग अपने बेंच प्रेस नंबरों के बारे में शेखी बघारना पसंद करते हैं। किसी भी हट्टे-कट्टे जिम जाने वाले व्यक्ति से पूछा जाने वाला सब से आम सवाल है, “तुम्हारा बेंच कितना है?”

कोई सोच सकता है कि बेंच प्रेस के बारे में इतना खास क्या है कि ज्यादातर लोग इसे अपनी मर्दानगी से जोड़ते हैं?

क्या बेंच प्रेस वास्तव में इतना ध्यान देने योग्य है?

सब से पहले, बहुत से अच्छे स्ट्रेंथ एथलीट अपने ऊपरी शरीर की शक्ति का श्रेय बेंच प्रेस को देते हैं. दूसरा, अच्छी बेंच प्रेस शक्ति खेल प्रदर्शन में प्रेसिंग स्ट्रेंथ के हस्तांतरण का काफी अच्छा संकेत प्रदान करती है (Baker; Garcia Lopez et al.)। तीसरा, यह तथ्य कि बेंच प्रेस दुनिया भर के इतने अधिक लिफ्टर और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करती है इसे अपने आप में खास और किये जानें योग्य आश्वस्तता प्रदान करता है(McLaughlin et al.; Elliott, B. C. et al.; Graham et al.)।

Heavy Bench Pressing
Heavy Bench Pressing

बेंच प्रेस और बड़े नंबर

‘गंभीर’ प्रशिक्षण के अपने पहले वर्ष में ‘गंभीर’ Lifters के सबसे आकांक्षित लक्ष्यों में से एक Power-Lifts पर 3/4/5 स्तर हासिल करना होता है। जिन लोगों को यह नहीं पता, इसका मतलब है कि 3 बीस किलोग्राम प्लेट्स को Olympic Bar के दोनों ओर बैंच प्रेस पर लोड करना। Squats पर 4 प्लेट्स और Deadlift पर प्रत्येक तरफ 5 प्लेट्स। Heavy लोडिंग परफॉरमेंस के लिए बहुत बढ़िया होती है और मांसपेशियों में अधिकतम गतिविधि पैदा करती है (Pinto et al.; Schick et al.; McCaw & Friday)। हमारे स्ट्रेंथ एथलीटों में से अधिकांश अपने गंभीर प्रशिक्षण के पहले साल के बाद एक या दो साल के समय के भीतर इस स्तर तक पहुंच जाते हैं।

इसके विपरीत तकरीबन सभी साधारण लिफ्टर्स, हैवी बेंच प्रेस में रूचि होने के बावजूद, अपने सारे ट्रेनिंग करियर में भी 3 प्लेट स्तर तक नहीं पहुंच पाते। इसमें कोई हैरानी कि बात भी नहीं लगती जब हम इस तथ्य को साथ में रखते हैं की अधिकांश लिफ्टर्स शक्ति वृद्धि के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम निर्माण का क, ख, ग भी नहीं जानते। न ही ज़्यादातर लोगों ने यह सीखा होता है कि व्यक्तिगत Leverages को ध्यान में रखते हुए एक तकनीकी रूप से सही बेंच प्रेस कैसे की जाती है।

हम आज बेंच प्रेस पर आपकी अपेक्षाकृत कमतर परफॉरमेंस के लिए प्रमुख योगदानकर्ताओं पर चर्चा करेंगे।

तकनीकी महारत का अभाव

यदि आप सही तरीके और कुशलता के साथ बेंच प्रेस का प्रशिक्षण लेने में सफल नहीं रहते हैं तो आप कभी भी अपनी परफॉरमेंस को उचित स्तर तक नहीं बढ़ा सकेंगे। आपके हर रेप एक जैसा दिखना चाहिए अन्यथा आप एक ही कसरत में माहिर होने की जगह उसके अलग अलग रूपांतरों का अभ्यास करते रहेंगे!

तकनीकी दक्षता हासिल करने का हल सिर्फ बार बार सही अभ्यास है।

Arnold Schwarzenegger Heavy Bench Press
Arnold Schwarzenegger Heavy Bench Press

लेकिन इससे पहले कि आप बिना सोचे समझे अभ्यास करना शुरू करें, पहले बेंच प्रेस के लिए उचित सेट-अप समझने के लिए अपना समय दें। यह निर्णायक है। वैसे तो सीखने का सबसे अच्छा तरीका एक सक्षम कोच की देख-रेख में अभ्यास करना ही होता है पर आपकी सुविधा के लिए हम आपको कुछ निर्देश अवश्य प्रदान करेंगे।

तकनीक युक्तियाँ

सेट-अप

  1. उचित पकड़ की चौड़ाई (Grip Width) रखें (आदर्श रूप से कंधे की चौड़ाई से लगभग 1.5 गुना) और, पकड़ की प्रकार (false / thumbless पकड़ या full पकड़) आवश्यकता या वरीयता के अनुसार।
  2. अपने कन्धों (Shoulder Blades) को परस्पर एक साथ खींचें और बेंच पर एक स्थान पर उन्हें स्थिर करें ताकि प्रेस करने के लिए एक ठोस आधार तैयार हो सके।
  3. अपने पैरों को अपने शरीर की तरफ खींचकर और छाती को ऊपर उठाने के द्वारा अपनी पीठ का एक कमान बनाएं (Powerlifting के अलावा कमर में एक बड़ा मेहराब (कमान) अनिवार्य नहीं है)। आपके घुटनों को आपके कूल्हों के नीचे होना चाहिए, लिफ्टरों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यह सबसे प्रभावी तकनीक है जो कि प्रभावी रूप से कमर में एक कमान बनाने के लिए उपयोग की जाती है।
  4. Lift-Off के लिए एक स्पॉटर का उपयोग करें। अगर आप अकेले अभ्यास कर रहे हैं, तो अपने आप को बेंच पर थोड़ा ऊपर की और सेट करें ताकि बार उठाते समय तकनीक खराब न हो। ऐसा करने में विफल रहने से आपको चरण दो में प्राप्त होने वाली स्थिरता कम हो जाएगी।
  5. बार नीचे छाती की और लाने से पहले बार की सही स्थिति को जान लें और उसे एक स्थिर बिंदु पर तय करें। यह बिंदु आपकी कलाई, कोहनी और कंधे के जोड़ों से होते हुए सीधी रेखा में सीधे आपके ऊपर होता है। आपको पूरे शरीर में तनाव महसूस होना चाहिए और विशेष रूप से टांगों में ताकि उचित ‘लेग ड्राइव’ प्राप्त हो सके।

निष्पादन

  1. पुनरावृत्ति के विलक्षण (Negative) भाग पर धीरे-धीरे नियंत्रण में बार को नीचे छाती की और लेकर जाएँ। आपको ‘बार को निचोड़ो‘ जैसे संकेतों का यथा-संभव उपयोग करना चाहिए, ताकि हाथों की मांसपेशियों को अधिकतम सक्रिय किया जा सके। इसके अलावा, संकेत जैसे की ‘कोहनियों को सिकोड़ो‘ के बारे में भूल जाईये, यह एक Raw लिफ्टर के लिए कोई मायने नहीं रखते। इसके बजाय, आपकी कोहनी की स्थिति हमेशा बार के ठीक नीचे ही रहनी चाहिए, जिसका अर्थ है कि कोहनियों में कुछ डिग्री का फैलाव रहेगा न कि सिकुड़न।
  2. Negative भाग में, निप्पल लाइन पर या उसके थोड़ा नीचे छाती को हल्के से स्पर्श करें, प्रत्येक पुनरावृत्ति (Rep) के दौरान आपको उसी बिंदु पर स्पर्श करना चाहिए।
  3. अपने कार्यक्रम के अनुसार, बार को छाती पर विराम दें या हल्के से छू कर पूरे बल के साथ प्रेस करें। बल आपकी पैरों और टांंगों से शुरू होकर, आपकी कोर से होते हुए, आपकी प्रेसिंग मांसपेशियों तक जाना चाहिए। पूरे बल के साथ प्रेस करना बेंच प्रेस की परफॉरमेंस के लिए उत्कृष्ट होता है (González-Badillo, JJ et al.) बार के ऊपर जाते समय अपनी कोहनियों को फैलाएं
  4. अंत में, ऊपर की और प्रेस करते समय आपको बार पथ सीधा ऊपर की बजाय अपने चेहरे की ओर रखना है। प्रेसिंग के अंत में बार की स्थिति  Clavicles (कॉलर हड्डियों) के बिलकुल ऊपर या उससे हल्का सा आगे होनी चाहिए।
  5. व्यायाम के दौरान साँस लेने के उचित पैटर्न को भी ध्यान में रखें। लिफ्ट-ऑफ से पहले गहरी सांस लें और पूरे Rep के दौरान अपनी सांस थामे रखें। रेप पूरा होने के बाद शीर्ष पर ही सांस छोड़ें।

अगर यह सारा सेट-अप आपको बहुत परिश्रम वाला काम लग रहा है तो, आप बिल्कुल सही हैं क्युंकि इसे मास्टर करने के लिए काफी अभ्यास की आवश्यकता है। आपकी प्रशिक्षण के इस अवसर पर एक अच्छे कोच का मौजूद होना ईश्वर के वरदान के समान है।

शक्ति वृद्धि हेतु अपर्याप्त प्रोग्राम निर्माण

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए पर्याप्त प्रोग्राम निर्माण आवश्यक है। यदि आप अपने प्रशिक्षण को यथोचित रूप से प्रोग्राम करने में विफल रहते हैं, तो अंत में केवल निराशा ही आपकी हाथ लगेगी। लम्बे समय तक परिणामों की कमी आपको PED’s या स्टेरॉयड जैसी अवांछनीय वस्तुओं की ओर ले जाएगी, जबकि आपकी वास्तव ज़रूरत स्टेरॉइड्स नहीं बल्कि सिर्फ अच्छी प्रोग्रामिंग है।

शक्ति के लिए प्रोग्रामिंग के दो पहलू हैं:

  • सामान्य व्यापक शक्ति

यह सामान्य रूप में ताकत क्षमता के विकास को संदर्भित करता है, जैसे Over-Head Press, Close-grip Bench Press आदि परफॉर्म करने में मजबूत होना। इस प्रकार का शक्ति विकास आपके शरीर को सुसंगत बल के उत्पादन का समन्वय करने में सक्षम बनाता है। यह विभिन्न मांसपेशी समूहों में ताकत का संतुलन और चुस्ती-फुर्ती को भी बनाये रखता है।

  • विशिष्ट शक्ति

यह उच्च आवृत्ति के साथ बेंच प्रेस का अभ्यास और Periodization आदि पद्धतियों द्वारा एक विशिष्ट पैटर्न में ताकत और दक्षता के निर्माण से संबंधित है। बेहतर न्यूरो-मस्सल कनेक्शन, लयबद्ध muscle fiber firing और rate coding का सीधा सम्बन्ध बेहतर विशिष्ट शक्ति के विकास से है। किसी भी लिफ्ट को माहिर करने के लिए और बड़े नम्बरों में वज़न उठाने के लिए ‘विशिष्ट शक्ति’ बहुत महत्वपूर्ण है।

Weak Points की उपेक्षा

कमज़ोरियों की उपेक्षा और Weak Points के निवारण में चूक से आपकी प्रगति स्थिर हो जाती है। जब तक आप अपने Weak Points में उचित रूप से सुधार नहीं करते तब तक आपकी परफॉरमेंस में भी कोई सुधार नहीं होता। ज़ंजीर उतनी ही शक्तिशाली होती है जितनी कि उसकी कमज़ोर कड़ी में ताकत होती है। इसके अलावा Weak Points में सुधार आपको अगणित खेल सम्बन्धी चोटों से बचाता है, और आपकी मुख्य और सहायक मांसपेशियों में संतुलन भी बनाये रखता है।

Muscles Involved In Bench Press
Muscles Involved In Bench Press

कमजोर बिन्दुओं को मजबूत करने के इस्तेमाल को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। ज़्यादातर नए Lifters को छाती के स्तर पर पर्याप्त बल पैदा करने में परेशानी होती है, और इनके लिए सीने से थोड़ा ऊपर बेंच प्रेस का सबसे कठिन बिंदु होता है। इस हिस्से को मजबूत करने के लिए प्रत्येक Rep को छाती पर 1 सेकंड के विराम के साथ करें। इससे छाती पर से बल उत्पादन की क्षमता में सुधार आएगा और कसरत के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव प्रतिवर्त (Stretch Reflex) के दुर्बल होने से अधिक Muscle Fibres शामिल होंगें। लेकिन ध्यान रखें कि विराम के दौरान आपको मांसपेशियों पर से तनाव नहीं खोना चाहिए, मांसपेशियों का ज़ोर बना रहना चाहिए।

दूसरा, बेंच प्रेस में तल की स्थिति में कमज़ोरी का एक बहुत ही सामान्य कारण है आपको कंधे की मांसपेशियों का अपेक्षाकृत कमज़ोर होना (Van den Tillaar & Ettema)। आपको अपने कंधे की ताकत पर काम करना शुरू करने की आवश्यकता हो सकती है ताकि उन्हें आपकी Chest और Triceps के समकक्ष लाया जा सके।

समापन

अंत में, हैवी लिफ्टिंग एक कला भी है और विज्ञान भी, आपको अपने कार्यप्रणाली के दृष्टिकोण में सटीक होना चाहिए, लेकिन अभ्यास में लचीला भी होना चाहिए ताकि Weak Points के काम को समायोजित किया जा सके और साथ ही लिफ्ट में निपुणता भी उत्पन्न हो।

PS: उपरोक्त तकनीकें एक Raw बेंच प्रेसर के लिए उपयुक्त हैं। Shirted बेंच प्रेस के लिए एक अलग सेटअप और निष्पादन की आवश्यकता होती है। और अगर आपको Raw और शर्ट के बीच अंतर नहीं पता है, तो परेशान न हों, बस ऊपर बताई गयी तकनीकों को अपनी क्षमता अनुसार आत्मसात करने की कोशिश करें।

संदर्भ:

  • Baker, D. (2001). Comparison of upper-body strength and power between professional and college-aged rugby league players. The Journal of Strength & Conditioning Research, 15(1), 30-35.
  • Elliott, B. C., Wilson, G. J., & Kerr, G. K. (1989). A biomechanical analysis of the sticking region in the bench press. Medicine & Science in Sports & Exercise, (21), 450-62
  • García-López, D., Hernández-Sánchez, S., Martín, E., Marín, P. J., Zarzosa, F., & Herrero, A. J. (2014). Free-weight augmentation with elastic bands improves bench-press kinematics in professional rugby players. Journal of Strength and Conditioning Research.
  • Graham, J. F. (2003). Bench Press Barbell. Strength & Conditioning Journal, 25(3), 50-51.
  •  Juan José González-Badillo, David Rodríguez-Rosell, Luis Sánchez-Medina, Esteban M. Gorostiaga, and Fernando Pareja-Blanco. Maximal intended velocity training induces greater gains in bench press performance than deliberately slower half-velocity training. European Journal Of Sport Science Vol. 14 , Iss. 8,2014.
  • McCaw, S. T., & Friday, J. J. (1994). A Comparison of Muscle Activity Between a Free Weight and Machine Bench Press. The Journal of Strength & Conditioning Research, 8(4), 259-264.
  • McLaughlin, T. M. (1984). Bar path and the bench press. Powerlifting USA, 8(5), 19-20.
  • Pinto, R., Cadore, E., Correa, C., da Silva, B., Alberton, C., Lima, C., & de Moraes, A. (2013). Relationship between workload and neuromuscular activity in the bench press exercise. Medicina Sportiva, 17(1), 1-6.
  • Schick, E. E., Coburn, J. W., Brown, L. E., Judelson, D. A., Khamoui, A. V., Tran, T. T., & Uribe, B. P. (2010). A comparison of muscle activation between a Smith machine and free weight bench press. The Journal of Strength & Conditioning Research, 24(3), 779-784.
  • Van den Tillaar, R., & Ettema, G. (2013). A comparison of muscle activity in concentric and counter movement maximum bench press. Journal of human kinetics, 38, 63-71.

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